बुधवार, 23 फ़रवरी 2022

चार ग्रहों का राशि परिवर्तन और 5 ग्रहों का संयोग

*ज्योतिष गणना के अनुसार 23 से 27 फरवरी के बीच कई बड़े ग्रह अपनी राशि बदलने वाले हैं।* *श्री मंशापूर्ण ज्योतिष शिवपुरी* 9993472153

ग्रह एक निश्चित अंतराल पर राशि परिवर्तन, वक्री, मार्गी, अस्त, उदय, युति, योग और नक्षत्रों का परिवर्तन करते रहते हैं जिसका विशेष महत्व होता है । *डॉ विकासदीप शर्मा* के अनुसार चार ग्रह करेंगे राशि परिवर्तन
फरवरी 2022 के अंतिम दिनों में गुरु अस्त होने वाले हैं।
27 फरवरी, 2022 को मकर राशि में ग्रहों की एक विशेष युति आरंभ होगी। बुध,मंगल व शनि पहले से इस में बैठे थे,उसी दिन चंद्रमा भी प्रवेश कर जाएंगे और शुक्र भी आ जाएंगे। इसलिए 5 राज्यों के चुनावी नतीजे इन 5 ग्रहों से प्रभावित रहेंगे। चुनाव के परिणाम 10 मार्च को अपेक्षित हैं। तीन ग्रह शुक्र,मंगल और शनि मकर राशि में औेर दो ग्रह बुध व गुरु कुंभ राशि में रहेंगे। मकर तथा कुंभ राशियां शनि ग्रह से संचालित हैं। जिनकी कुंडली में शनि उच्च या कारक ग्रह हैं उनके लिए इलेक्शन के रिजल्ट किस्मत पलट साबित होंगे। जिनके जन्मांग में पूर्ण कालसर्प योग है,उनका भाग्य भी बदलने वाला है। अर्श से फर्श पर और फर्श से अर्श तक की पोजीशन बनेगी अर्थात अचानक सरकार को विशेष लाभ योग मिल सकता है। जो सोचा वो होगा नहीं,जिसे नहीं सोचा वह अचानक हो जाएगा। कालसर्प दोष अकस्मात देगा लाभ *यही है कालसर्प योग का कमाल।*

 

*23 फरवरी को देवगुरु बृहस्पति* अस्त होने वाले हैं। फिर इसके बाद  *26 फरवरी दिन शनिवार को महान पराक्रमी और लाल ग्रह मंगलदेव* शनिदेव की राशि मकर में गोचर करेंगे। जहां पर पहले से ही शनि विराजमान है
फिर इसके बाद *27 फरवरी को सुख और वैभव प्रदान करने वाले शुक्र ग्रह* भी मकर राशि में आ जाएंगे। वहीं इसी दिन यानी 27 फरवरी को *कर्मफलदाता और न्यायाधिपति ग्रह शनिदेव* स्वराशि मकर में उदय हो जाएंगे। एक साथ कई ग्रहों के संयोग से हर एक राशि के जातकों के जीवन में बदलाव देखने को मिलेगा।


*कुंभ राशि में देवगुरु होंगे अस्त*
ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के अस्त और उदय होने का विशेष महत्व होता है। जब भी कोई प्रमुख ग्रह अस्त होता है उसका प्रभाव क्षीण हो जाता है। डॉ विकास दीप के अनुसार 23 फरवरी को शुभ ग्रह माने जानें वाले, शिक्षा, ज्ञान ,वैवाहिक जीवन और संतान के कारक ग्रह गुरु शनि देव की राशि कुंभ राशि में अस्त हो जाएंगे। गुरु के अस्त होने पर विवाह जैसे अनुष्ठान कुछ समय के लिए थम जाएंगे।
गुरु के अस्त होने पर सबसे ज्यादा शुभ प्रभाव *मेष, मिथुन, सिंह, कन्या और मकर राशि वालों के जीवन में शुभ परिणाम देखने को मिल सकता है।* वहीं अगर गुरु के अस्त होने से *वृषभ, कर्क, तुला, वृश्चिक, धनु,कुंभ और मीन* राशि के लोगों को कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

*शुक्र का गोचर मकर राशि में*
27 फरवरी  को सुख-समृद्धि, वैभव और ऐशोआराम प्रदान करने वाले शुक्र ग्रह मकर राशि में गोचर करते हुए मंगल के साथ युति बनाएंगे। शुक्र ग्रह के मकर राशि में प्रवेश से कर्क,मेष और सिंह राशि के जीवन में कई तरह के सुनहरे अवसरों की प्राप्ति होगी।  वहीं इसके उलट वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला,वृश्चिक, धनु और मकर राशि के जातकों लिए समय परेशानियों से भरा रह सकता है। लेकिन ज्यादा चिंता की बात नहीं हैं यह सब थोड़े ही समय के लिए रहेगा
*मंगल का मकर राशि में गोचर*
क्रूर ग्रह माने जाने वाले मंगल ग्रह 26 फरवरी 2022 को धनु राशि से निकलकर अपनी उच्च राशि और शनिदेव की राशि मकर में गोचर करेंगे। मंगल ग्रह पराक्रम और स्वभाव से आक्रामक होते हैं। ऐसे में मंगल के मकर राशि में होने से मेष, वृषभ,मिथुन,कर्क,तूला, धनु ,मकर और कुंभ राशि के जातकों को विवाद और परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।वहीं सिंह,वृश्चिक और मीन राशि के जातकों को शुभ परिणाम देखने को मिल सकता है
*मकर राशि में शनि का उदय* *श्री मंशापूर्ण ज्योतिष अनुसार*
27 फरवरी को शनिदेव अपनी खुद की राशि मकर मे उदय होंगे। शनि के उदय होने से सिंह, वृश्चिक और मीन राशि वालों के जीवन में कई तरह के शुभ समाचारों की प्राप्ति होगी और धन लाभ होने की प्रबल संभावना है।  मेष, वृषभ, कन्या,कर्क, तुला, धनु, मकर और कुंभ राशि वालों को शनि के उदय होने से परेशानियां बढ़ सकती है।
*श्री मंशापूर्ण ज्योतिष डॉ विकासदीप शर्मा ज्योतिषाचार्य* *993462153, 9425137382*

मंगलवार, 4 जनवरी 2022

अंक ज्योतिष के अनुसार*वर्ष 2022 पर शनि ग्रह का शासन रहेगा ।

*2022  का मूलांक अंक 6 है जो शुक्र ग्रह का अंक है राजनीति और महामारी का भारत देश पर 2022 में कैसा रहेगा भविष्य?*
 *श्री मंशापूर्ण ज्योतिष अनुसार एक सूक्ष्म आंकलन ।।* 
====================
बर्ष 2022  के बारे में कुछ जानकारी ।   अधिकतर हर व्यक्ति अपने भविष्य के बारे में जानने के लिए  उत्सुक और जिज्ञासु होते ही  हैं, इसी बीच में बहुत से लोगों ने मुझे फोन और संदेश भेजे कि कुछ मार्गदर्शन करें कि वर्ष 2022 यानी कि आने वाला साल भारत के लिए कैसा रहने वाला है? *शुक्र का अंक कैसा देगा फल* 
अंक ज्योतिष के अनुसार*
वर्ष 2022 पर शनि ग्रह का शासन रहेगा । और यदि हम इस वर्ष का जोड़ देखे तो यह बनता है अंक 6 (2+0+2+2= 6) ऐसे में संभावना बन रही है कि इस वर्ष महिलाओं का शासन रहने वाला है। इस साल ढेरों शादियों की भी संभावना है, वहीं बात अगर वैश्विक महामारी की करें तो महामारी का असर 2022 में ज्यादा प्रभावशाली नही रहेगा ना के बराबर प्रभाव दिखाएगा जिससे ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नही है। लेकिन सचेत अवश्य रहे ।
ज्योतिष की मान्यताओं के अनुसार मकर राशि में शनि का प्रवेश तथा वहां पर प्लूटो के साथ उसका संबंध कोरोना जैसी घातक संक्रामक बीमारी का कारक बना था। 29 अप्रैल 2022 को शनिदेव मकर राशि को त्यागकर कुंभ में प्रवेश कर जाएंगे। लेकिन अपनी वक्री गति से एक बार फिर 12 जुलाई 2022 को शनि का प्रवेश मकर में हो जाएगा। इसके पश्चात 17 जनवरी 2023 को पूर्णरूपेण मकर राशि से शनिदेव बाहर होंगे। शनि देव की चाल पर कहा जा सकता है कि कोरोना की तीसरी लहर का खतरा अभी टला नहीं है। ग्रहों की इस अजीबोगरीब स्थिति को देखते हुए जनमानस से यही अपेक्षा की जा सकती है कि संक्रमण को लेकर फिलहाल पूर्ण सावधानी बरतना आवश्यक होगा। विशेष तौर पर फरवरी 
2022 तक का समय कोरोना के दृष्टिकोण से अच्छा नहीं कहा जा सकता है तथा तीसरी लहर के तीव्र होने की संभावना इस अवधि तक रहेगी। जनमानस के लिए सावधानी अपेक्षित होगी। नव वर्ष में मध्य के पश्चात ही कोरोना की विदाई दिखाई दे रही है।डॉ विकासदीप मंशापूर्ण अनुसार अंक ज्योतिष के आधार पर यदि देखा जाए तो 2022 का मूलांक 6 बन रहा है। 
अंक ज्योतिष के अनुसार नया वर्ष देश में भौतिक समृद्धि कारक होगा तथा महिलाओं के लिए विशेष शुभ जाने वाला है। जनमानस के बीच में ऐश्वर्याता का प्रभाव बढ़ेगा। 3,6 व 9 मूलांक में जन्म लिए हुए लोगों का नव वर्ष शुभ जाने वाला है। मूलांक 1 वाले लोगों के लिए नव वर्ष सामान्य रहेगा तो 2 मूलांक वालों के लिए सामान्य शुभ अशुभ रहने वाला है। 3 मूलांक के लिए अंक ज्योतिष के अनुसार नव वर्ष शुभ है लेकिन चार मूलांक वालों को सावधानी रखने की आवश्यकता होगी। एक बार फिर 5 मूलांक के लिए नव वर्ष शुभ है। 6 मूलांक के लिए भी नव वर्ष का आगमन शुभताओं से भरा हुआ होगा। 7 मूलांक वाले लोगों के लिए सामान्य शुभ तथा 8 और 9 मूलांक के लिए नव वर्ष मंगलकारी होगा
यह सवाल इसलिए भी जरूरी है क्योंकि बीते 2 वर्षो से कोरोना वायरस ने भारत को ऐसे मोड़ पर ला दिया है जिसके बारे में हम में से कोई भी तैयार नहीं था।
*2022 के बड़े ग्रहों का राशि परिवर्तन का असर ओर संभावित बदलाव और परिवर्तन* 
डॉ विकासदीप के अनुसार वर्ष 2022 में अप्रैल 2022महीने में मीन राशि में बृहस्पति का गोचर होने वाला है और राहु और केतु का गोचर मेष और तुला राशि में होगा। वहीं शनि ग्रह 16 अप्रैल 2022 से लेकर जुलाई 2022 तक कुंभ राशि में रहने वाले है, इन सभी कारणों की वजह से वर्ष 2022 की पहली छमाही बहुत ज्यादा अनुकूल नहीं रहने वाली है, इस दौरान देश में कई अहम उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं, जुलाई 2022 तक यानी कि, सरल शब्दों में कहें तो इस साल की पहली छमाही तक स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं और नए वायरस से जुड़ी दिक्कतें लोगों को थोड़ा बहुत तो परेशान कर सकती हैं। हालांकि जुलाई 2022 के बाद देश की स्थिति में सुधार देखने को मिल सकता है वहीं देश की वित्तीय स्थिति की बात करें तो यह वर्ष के अंत तक देखने को अच्छा होगा, अगस्त के बाद नई तकनीकी विकास संभव हो सकते हैं। इस समय अवधि तक बृहस्पति शनि का संयोग खत्म हो चुका होगा और इसके बाद ग्रहों का कोई बड़ा संयोग नहीं होने वाला है। 19 अप्रैल 2022 में बृहस्पति का गोचर मीन राशि में होगा और यह 2023 तक इसी स्थिति में रहने वाले  है। बृहस्पति के इस गोचर से देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
*वर्ष 2022 में राजनीति में आएंगे क्या बदलाव?* 
 *श्री मंशापूर्ण ज्योतिष डॉ विकास दीप के अनुसार* वर्ष 2021 की बात करें तो राजनीति के क्षेत्र में इस साल बेहद ही उतार-चढ़ाव वाली स्थिति देखने को मिली थी वहीं इसके विपरीत साल 2022 राजनीति के लिहाज से अनुकूल रहने वाला है। विशेष तौर पर जुलाई के बाद सरकार हर क्षेत्र के लिए नीतियों के संबंध में राजनीतिक मोर्चे पर जुर्माने के फैसले ले सकती है। सरकार स्वास्थ्य मोर्चे और वायरस के संबंध में जुलाई के बाद और अधिक जन जागरूकता पैदा कर सकती है और इसके लिए मुमकिन है कि सरकार कोई अलग नीति भी बना दे। मध्यप्रदेश की  राजनीति में भी एक बड़ा परिवर्तन अप्रैल 2022 तक आएगा ।
*वर्ष 2022 के लिए महत्वपूर्ण बातें* वर्ष 2022 में जुलाई के बाद का समय ज्यादा अनुकूल रहने वाला है क्योंकि इस दौरान मीन राशि में बृहस्पति का प्रमुख गोचर होगा और मकर राशि में शनि का गोचर होगा जो कि देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की संभावना पैदा कर रहा है, इस साल में कर्क राशि, मकर राशि, और कुंभ राशि के जातकों को स्वास्थ्य के संदर्भ में ध्यान रखने की ज्यादा आवश्यकता पड़ेगी, जैसा कि हमने पहले भी बताया कि यह साल शुक्र का है और साल की शुरुआत में ही शुक्र शनि के साथ रहेंगे ऐसे में व्यक्तिगत मोर्चे पर इसके अनुकूल परिणाम देखने को मिलेंगे और इस वर्ष ज्यादा विवाह संपन्न होंगे। जैसा कि राहु राशि चक्र की पहली राशि अर्थात मेष में प्रवेश करेगा और केतु सातवें भाव में, *ऐसे में विदेशी निवेश की संभावनाएं अधिक रहेंगी और वायरस की तीव्रता में कमी देखने को मिलेगी* अप्रैल 2022 से बृहस्पति अपनी ही राशि मीन में स्थित होगे जिससे देश और भारत की अर्थव्यवस्था की स्थिति सकारात्मक दिशा में बढ़ेगी, इसके अलावा दूसरा प्रमुख ग्रह यानि शनि भी जुलाई 2022 के दौरान कुंभ राशि से निकलकर वापस मकर राशि में प्रवेश करेगा जिसके कारण देश में रोजगार के नए अवसर, व्यापार में वृद्धि, और सभी अच्छी चीजों के साथ साथ देश में अच्छी और सकारात्मक बदलाव की सौगात देखने मिलेगी, 
*वैश्विक आर्थिक संकट से दूर* 
जो एक अहम संकट दुनिया और भारत को लंबे समय से सता रहा था वह जुलाई  2022 के बाद हल होना शुरू हो जाएगा और अगस्त या वर्ष  के अंत तक देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति ठीक होने लगेगी। अपनी अनुकूल राशि मीन में बृहस्पति की स्थिति से वैश्विक मंदी की स्थिति भी धीरे-धीरे हल होनी शुरू हो जाएगी, भारत के साथ-साथ विभिन्न देशों के बीच जो भ्रम की स्थिति देखने को मिल रही थी वह भी खत्म होने लगेगी। *भारत चीन के बीच युद्ध भी 2022 में खत्म हो जाएगा और उनसे जुड़ी सभी परेशानियां भी कम हो जाएंगी* सीमाओं पर कोई बड़ी समस्या नही रहेगी।
*वर्ष 2022 में होगा ही होगा कोरोना वायरस का अंत?* 
वर्ष 2020 से पूरी दुनिया को सता रही वैश्विक महामारी कोरोना वायरस साल 2022 की दूसरी छमाही यानी अगस्त के बाद धीरे-धीरे समाप्त हो सकती है। हालांकि अभी वायरस की एक और लहर यानी तीसरी लहर आ सकती है लेकिन यह बहुत ज्यादा विकराल नहीं होगी और इसी के साथ महामारी का अंत हो जाएगा। हालाँकि यह वायरस पूरी तरह से खत्म नहीं होगा और मलेरिया आदि के रूप में अपना सिर दोबारा उठा सकता है, नई दवाएं और लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग के जरिए इस वायरस से काफी हद तक रोकने में सहायक साबित हो सकते हैं।
इस समय *वायरस के संदर्भ में सरकार और स्वास्थ्य संस्थाओं की तरफ से जारी की गई गाइडलाइंस और नियमों का पालन करना अनुकूल रहेगा* दूसरे देश में पाया गया ओमीक्रॉन वायरस से भारत निपट सकता है और दवाएं इस वायरस से निपटने में मदद कर सकती हैं। इस वायरस से निपटने के लिए भारत सरकार कुछ कड़े और महत्वपूर्ण नियम लागू कर सकती है। वायरस से बेहतर ढंग से लड़ा जा सके और उस पर नियंत्रण पाया जा सके इसके लिए बेहद आवश्यक है कि सरकार द्वारा जारी मानदंडों और गाइडलाइंस का पालन किया जाए।

श्री मंशापूर्ण ज्योतिष डॉ विकास दीप शर्मा 9425137382
9993462153

रविवार, 26 दिसंबर 2021

शुभ ऊर्जा के यँत्र ओर कलश

नमस्कार
शुभ ऊर्जा के द्वारा हमने कुल 5 तरह के अलग अलग यँत्र तैयार किये  गए है । जो अनेकों यँत्र, पिरामिड, वास्तु सामग्री , नवरत्न, जड़ी बूटी, ऊर्जा तत्व सामग्री, क्रिस्टल, आदि सामग्री द्वारा निर्मित शुभ ऊर्जा एक सकरात्मक ऊर्जा यँत्र है ।जो नकारात्मकता को समाप्त करके हमारे जीवन मे शुभ ऊर्जा प्रदान करता है । निम्न 5 यँत्र अलग अलग है  ।। सभी यँत्र बॉक्स ओर किट के रूप में तैयार किये गए है।

1 *शुभ ऊर्जा यँत्र* :- यह यँत्र बॉक्स रूप में है इस यँत्र के सकारात्मक प्रभाव के रूप में घर का वास्तु दोष, नजर दोष, ऊपरी बाधा, पित्र दोष, टोना टोटका, भूमि ऊर्जा नवग्रह बाधा, ओर बंधन दोष को दूर करता है । इस यँत्र कि अपनी एक औरा होती है जो उपरोक्त दोषों को शमन करती है ।


2 *शुभ ऊर्जा मंगल कलश* :- व्यक्ति को भवन में सुख मिलेगा या दुःख यह निर्धारण वहाँ की जमीन से किया जाता है। इसीलिये भवन बनाने से पूर्व मंगल कलश स्थापित किया जाता है *शुभ ऊर्जा मंगल कलश*  के रूप में बनाया गया है जिसको नवीन घर के निर्माण के समय भूमि में दबा दिया जाता है । उपरोक्त यँत्र को दवाने से नवीन भूमि  के पूर्व के अगर कोई दोष है तो उसके दुष्प्रभाव को खत्म करके शुभ ऊर्जा प्रदान करता है।


3 *शुभ ऊर्जा मंगल कार्य यँत्र* :--  शुभ ऊर्जा मंगल कार्य यँत्र घर मे जब मंगल कार्य जैसे विवाह, संतान नॉकरी में  बाधा आती है तब इस यँत्र की स्थापना करके पूजा की जाती है जिसके सकारात्मक प्रभाव के रूप में घर मे मंगलीक कार्य शुरू होने लगते है । मंगलीक दोष में यह यँत्र शीघ्र कार्य करता है ।अमंगल को दूर करके मंगल करने वाला शुभ ऊर्जा मंगल यँत्र स्थापित करे।


  *शुभ ऊर्जा मंगल कलश* :- इस मंगल कलश को कन्या के विवाह के समय पिता के द्वारा आशिर्बाद के रूप में बेटी को दिया जाता है । जिसे कन्या अपनी ससुराल में ले जाकर स्थापित करके पूजा करती है तो पिता का आशिर्बाद प्राप्त होता है ।जिसके  फल स्वरूप उंसको ससुराल में सुखी जीवन प्राप्त होता है ।

5 *त्रिशक्ति शुभ ऊर्जा यँत्र*:- यह पॉकेट यँत्र है । जिसको जेब मे या घर मे तकिये के नीचे रखा जाता है । यह यँत्र मानशिक अवसाद , तनाव, हताशा, डिप्रेशन, ओर नेगेटिविटी को कम करने का कार्य  करता है  । इस यँत्र के शुभ प्रभाव से व्यक्ति ऊर्जात्मक बना रहता है और  तनाव  मुक्त रहता है।   वर्तमान में हम जिस हवा रूपी बीमारियों से ग्रसित हो रहे है । त्रिशक्ति पावर यँत्र द्वारा हमे रोग प्रतिरोधक छमता बढ़ जाती है ।

*संपर्क करे* :- **डॉ विकासदीप शर्मा*
*श्री मंशापूर्ण ज्योतिष शिवपुरी**
*9425137382
9993462153*


शुक्रवार, 24 दिसंबर 2021

पौराणिक काल के 24 चर्चित श्राप

पौराणिक काल के 24 चर्चित श्राप और उनके पीछे की कहानी*
〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️
हिन्दू पौराणिक ग्रंथो में अनेको अनेक श्रापों का वर्णन मिलता है। हर श्राप के पीछे कोई न कोई कहानी जरूर मिलती है। आज हम आपको हिन्दू धर्म ग्रंथो में उल्लेखित 24 ऐसे ही प्रसिद्ध श्राप और उनके पीछे की कहानी बताएँगे।
श्री मंशापूर्ण ज्योतिष शिवपुरी 9993462153
1👉 युधिष्ठिर का स्त्री जाति को श्राप
महाभारत के शांति पर्व के अनुसार युद्ध समाप्त होने के बाद जब कुंती ने युधिष्ठिर को बताया कि कर्ण तुम्हारा बड़ा भाई था तो पांडवों को बहुत दुख हुआ। तब युधिष्ठिर ने विधि-विधान पूर्वक कर्ण का भी अंतिम संस्कार किया। माता कुंती ने जब पांडवों को कर्ण के जन्म का रहस्य बताया तो शोक में आकर युधिष्ठिर ने संपूर्ण स्त्री जाति को श्राप दिया कि - आज से कोई भी स्त्री गुप्त बात छिपा कर नहीं रख सकेगी।

2👉 ऋषि किंदम का राजा पांडु को श्राप
महाभारत के अनुसार एक बार राजा पांडु शिकार खेलने वन में गए। उन्होंने वहां हिरण के जोड़े को मैथुन करते देखा और उन पर बाण चला दिया। वास्तव में वो हिरण व हिरणी ऋषि किंदम व उनकी पत्नी थी। तब ऋषि किंदम ने राजा पांडु को श्राप दिया कि जब भी आप किसी स्त्री से मिलन करेंगे। उसी समय आपकी मृत्यु हो जाएगी। इसी श्राप के चलते जब राजा पांडु अपनी पत्नी माद्री के साथ मिलन कर रहे थे, उसी समय उनकी मृत्यु हो गई।
3👉 माण्डव्य ऋषि का यमराज को श्राप
महाभारत के अनुसार माण्डव्य नाम के एक ऋषि थे। राजा ने भूलवश उन्हें चोरी का दोषी मानकर सूली पर चढ़ाने की सजा दी। सूली पर कुछ दिनों तक चढ़े रहने के बाद भी जब उनके प्राण नहीं निकले, तो राजा को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने ऋषि माण्डव्य से क्षमा मांगकर उन्हें छोड़ दिया। तब ऋषि यमराज के पास पहुंचे और उनसे पूछा कि मैंने अपने जीवन में ऐसा कौन सा अपराध किया था कि मुझे इस प्रकार झूठे आरोप की सजा मिली। तब यमराज ने बताया कि जब आप 12 वर्ष के थे, तब आपने एक फतींगे की पूंछ में सींक चुभाई थी, उसी के फलस्वरूप आपको यह कष्ट सहना पड़ा। तब ऋषि माण्डव्य ने यमराज से कहा कि 12 वर्ष की उम्र में किसी को भी धर्म-अधर्म का ज्ञान नहीं होता। तुमने छोटे अपराध का बड़ा दण्ड दिया है। इसलिए मैं तुम्हें श्राप देता हूं कि तुम्हें शुद्र योनि में एक दासी पुत्र के रूप में जन्म लेना पड़ेगा। ऋषि माण्डव्य के इसी श्राप के कारण यमराज ने महात्मा विदुर के रूप में जन्म लिया।

4👉  नंदी का रावण को श्राप
वाल्मीकि रामायण के अनुसार एक बार रावण भगवान शंकर से मिलने कैलाश गया। वहां उसने नंदीजी को देखकर उनके स्वरूप की हंसी उड़ाई और उन्हें बंदर के समान मुख वाला कहा। तब नंदीजी ने रावण को श्राप दिया कि बंदरों के कारण ही तेरा सर्वनाश होगा।

5👉  कद्रू का अपने पुत्रों को श्राप
महाभारत के अनुसार ऋषि कश्यप की कद्रू व विनता नाम की दो पत्नियां थीं। कद्रू सर्पों की माता थी व विनता गरुड़ की। एक बार कद्रू व विनता ने एक सफेद रंग का घोड़ा देखा और शर्त लगाई। विनता ने कहा कि ये घोड़ा पूरी तरह सफेद है और कद्रू ने कहा कि घोड़ा तो सफेद हैं, लेकिन इसकी पूंछ काली है।
कद्रू ने अपनी बात को सही साबित करने के लिए अपने सर्प पुत्रों से कहा कि तुम सभी सूक्ष्म रूप में जाकर घोड़े की पूंछ से चिपक जाओ, जिससे उसकी पूंछ काली दिखाई दे और मैं शर्त जीत जाऊं। कुछ सर्पों ने कद्रू की बात नहीं मानी। तब कद्रू ने अपने उन पुत्रों को श्राप दिया कि तुम सभी जनमजेय के सर्प यज्ञ में भस्म हो जाओगे।
6👉  उर्वशी का अर्जुन को श्राप
महाभारत के युद्ध से पहले जब अर्जुन दिव्यास्त्र प्राप्त करने स्वर्ग गए, तो वहां उर्वशी नाम की अप्सरा उन पर मोहित हो गई। यह देख अर्जुन ने उन्हें अपनी माता के समान बताया। यह सुनकर क्रोधित उर्वशी ने अर्जुन को श्राप दिया कि तुम नपुंसक की भांति बात कर रहे हो। इसलिए तुम नपुंसक हो जाओगे, तुम्हें स्त्रियों में नर्तक बनकर रहना पड़ेगा। यह बात जब अर्जुन ने देवराज इंद्र को बताई तो उन्होंने कहा कि अज्ञातवास के दौरान यह श्राप तुम्हारी मदद करेगा और तुम्हें कोई पहचान नहीं पाएगा।

7👉 तुलसी का भगवान विष्णु को श्राप
शिवपुराण के अनुसार शंखचूड़ नाम का एक राक्षस था। उसकी पत्नी का नाम तुलसी था। तुलसी पतिव्रता थी, जिसके कारण देवता भी शंखचूड़ का वध करने में असमर्थ थे। देवताओं के उद्धार के लिए भगवान विष्णु ने शंखचूड़ का रूप लेकर तुलसी का शील भंग कर दिया। तब भगवान शंकर ने शंखचूड़ का वध कर दिया। यह बात जब तुलसी को पता चली तो उसने भगवान विष्णु को पत्थर हो जाने का श्राप दिया। इसी श्राप के कारण भगवान विष्णु की पूजा शालीग्राम शिला के रूप में की जाती है।

8👉 श्रृंगी ऋषि का परीक्षित को श्राप
पाण्डवों के स्वर्गारोहण के बाद अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित ने शासन किया। उसके राज्य में सभी सुखी और संपन्न थे। एक बार राजा परीक्षित शिकार खेलते-खेलते बहुत दूर निकल गए। तब उन्हें वहां शमीक नाम के ऋषि दिखाई दिए, जो मौन अवस्था में थे। राजा परीक्षित ने उनसे बात करनी चाहिए, लेकिन ध्यान में होने के कारण ऋषि ने कोई जबाव नहीं दिया।
ये देखकर परीक्षित बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने एक मरा हुआ सांप उठाकर ऋषि के गले में डाल दिया। यह बात जब शमीक ऋषि के पुत्र श्रृंगी को पता चली तो उन्होंने श्राप दिया कि आज से सात दिन बात तक्षक नाग राजा परीक्षित को डंस लेगा, जिससे उनकी मृत्यु हो जाएगी।

9👉  राजा अनरण्य का रावण को श्राप
वाल्मीकि रामायण के अनुसार रघुवंश में एक परम प्रतापी राजा हुए थे, जिनका नाम अनरण्य था। जब रावण विश्वविजय करने निकला तो राजा अनरण्य से उसका भयंकर युद्ध हुई। उस युद्ध में राजा अनरण्य की मृत्यु हो गई। मरने से पहले उन्होंने रावण को श्राप दिया कि मेरे ही वंश में उत्पन्न एक युवक तेरी मृत्यु का कारण बनेगा। इन्हीं के वंश में आगे जाकर भगवान श्रीराम ने जन्म लिया और रावण का वध किया।

10👉  परशुराम का कर्ण को श्राप
महाभारत के अनुसार परशुराम भगवान विष्णु के ही अंशावतार थे। सूर्यपुत्र कर्ण उन्हीं का शिष्य था। कर्ण ने परशुराम को अपना परिचय एक सूतपुत्र के रूप में दिया था। एक बार जब परशुराम कर्ण की गोद में सिर रखकर सो रहे थे, उसी समय कर्ण को एक भयंकर कीड़े ने काट लिया। गुरु की नींद में विघ्न न आए, ये सोचकर कर्ण दर्द सहते रहे, लेकिन उन्होंने परशुराम को नींद से नहीं उठाया।
नींद से उठने पर जब परशुराम ने ये देखा तो वे समझ गए कि कर्ण सूतपुत्र नहीं बल्कि क्षत्रिय है। तब क्रोधित होकर परशुराम ने कर्ण को श्राप दिया कि मेरी सिखाई हुई शस्त्र विद्या की जब तुम्हें सबसे अधिक आवश्यकता होगी, उस समय तुम वह विद्या भूल जाओगे।

11👉 तपस्विनी का रावण को श्राप
वाल्मीकि रामायण के अनुसार एक बार रावण अपने पुष्पक विमान से कहीं जा रहा था। तभी उसे एक सुंदर स्त्री दिखाई दी, जो भगवान विष्णु को पति रूप में पाने के लिए तपस्या कर रही थी। रावण ने उसके बाल पकड़े और अपने साथ चलने को कहा। उस तपस्विनी ने उसी क्षण अपनी देह त्याग दी और रावण को श्राप दिया कि एक स्त्री के कारण ही तेरी मृत्यु होगी।
12👉  गांधारी का श्रीकृष्ण को श्राप
महाभारत के युद्ध के बाद जब भगवान श्रीकृष्ण गांधारी को सांत्वना देने पहुंचे तो अपने पुत्रों का विनाश देखकर गांधारी ने श्रीकृष्ण को श्राप दिया कि जिस प्रकार पांडव और कौरव आपसी फूट के कारण नष्ट हुए हैं, उसी प्रकार तुम भी अपने बंधु-बांधवों का वध करोगे। आज से छत्तीसवें वर्ष तुम अपने बंधु-बांधवों व पुत्रों का नाश हो जाने पर एक साधारण कारण से अनाथ की तरह मारे जाओगे। गांधारी के श्राप के कारण ही भगवान श्रीकृष्ण के परिवार का अंत हुआ।

13👉 महर्षि वशिष्ठ का वसुओं को श्राप
महाभारत के अनुसार भीष्म पितामह पूर्व जन्म में अष्ट वसुओं में से एक थे। एक बार इन अष्ट वसुओं ने ऋषि वशिष्ठ की गाय का बलपूर्वक अपहरण कर लिया। जब ऋषि को इस बात का पता चला तो उन्होंने अष्ट वसुओं को श्राप दिया कि तुम आठों वसुओं को मृत्यु लोक में मानव रूप में जन्म लेना होगा और आठवें वसु को राज, स्त्री आदि सुखों की प्राप्ति नहीं होगी। यही आठवें वसु भीष्म पितामह थे।

14👉 शूर्पणखा का रावण को श्राप
वाल्मीकि रामायण के अनुसार रावण की बहन शूर्पणखा के पति का नाम विद्युतजिव्ह था। वो कालकेय नाम के राजा का सेनापति था। रावण जब विश्वयुद्ध पर निकला तो कालकेय से उसका युद्ध हुआ। उस युद्ध में रावण ने विद्युतजिव्ह का वध कर दिया। तब शूर्पणखा ने मन ही मन रावण को श्राप दिया कि मेरे ही कारण तेरा सर्वनाश होगा।

15👉 ऋषियों का साम्ब को श्राप
महाभारत के मौसल पर्व के अनुसार एक बार महर्षि विश्वामित्र, कण्व आदि ऋषि द्वारका गए। तब उन ऋषियों का परिहास करने के उद्देश्य से सारण आदि वीर कृष्ण पुत्र साम्ब को स्त्री वेष में उनके पास ले गए और पूछा कि इस स्त्री के गर्भ से क्या उत्पन्न होगा। क्रोधित होकर ऋषियों ने श्राप दिया कि श्रीकृष्ण का ये पुत्र वृष्णि और अंधकवंशी पुरुषों का नाश करने के लिए लोहे का एक भयंकर मूसल उत्पन्न करेगा, जिसके द्वारा समस्त यादव कुल का नाश हो जाएगा।

16👉 दक्ष का चंद्रमा को श्राप
शिवपुराण के अनुसार प्रजापति दक्ष ने अपनी 27 पुत्रियों का विवाह चंद्रमा से करवाया था। उन सभी पत्नियों में रोहिणी नाम की पत्नी चंद्रमा को सबसे अधिक प्रिय थी। यह बात अन्य पत्नियों को अच्छी नहीं लगती थी। ये बात उन्होंने अपने पिता दक्ष को बताई तो वे बहुत क्रोधित हुए और चंद्रमा को सभी के प्रति समान भाव रखने को कहा, लेकिन चंद्रमा नहीं माने। तब क्रोधित होकर दक्ष ने चंद्रमा को क्षय रोग होने का श्राप दिया।

17👉 माया का रावण को श्राप
रावण ने अपनी पत्नी की बड़ी बहन माया के साथ भी छल किया था। माया के पति वैजयंतपुर के शंभर राजा थे। एक दिन रावण शंभर के यहां गया। वहां रावण ने माया को अपनी बातों में फंसा लिया। इस बात का पता लगते ही शंभर ने रावण को बंदी बना लिया। उसी समय शंभर पर राजा दशरथ ने आक्रमण कर दिया।
इस युद्ध में शंभर की मृत्यु हो गई। जब माया सती होने लगी तो रावण ने उसे अपने साथ चलने को कहा। तब माया ने कहा कि तुमने वासना युक्त होकर मेरा सतित्व भंग करने का प्रयास किया। इसलिए मेरे पति की मृत्यु हो गई, अत: तुम्हारी मृत्यु भी इसी कारण होगी।

18👉 शुक्राचार्य का राजा ययाति को श्राप
महाभारत के एक प्रसंग के अनुसार राजा ययाति का विवाह शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी के साथ हुआ था। देवयानी की शर्मिष्ठा नाम की एक दासी थी। एक बार जब ययाति और देवयानी बगीचे में घूम रहे थे, तब उसे पता चला कि शर्मिष्ठा के पुत्रों के पिता भी राजा ययाति ही हैं, तो वह क्रोधित होकर अपने पिता शुक्राचार्य के पास चली गई और उन्हें पूरी बात बता दी। तब दैत्य गुरु शुक्राचार्य ने ययाति को बूढ़े होने का श्राप दे दिया था।

19👉 ब्राह्मण दंपत्ति का राजा दशरथ को श्राप
वाल्मीकि रामायण के अनुसार एक बार जब राजा दशरथ शिकार करने वन में गए तो गलती से उन्होंने एक ब्राह्मण पुत्र का वध कर दिया। उस ब्राह्मण पुत्र के माता-पिता अंधे थे। जब उन्हें अपने पुत्र की मृत्यु का समाचार मिला तो उन्होंने राजा दशरथ को श्राप दिया कि जिस प्रकार हम पुत्र वियोग में अपने प्राणों का त्याग कर रहे हैं, उसी प्रकार तुम्हारी मृत्यु भी पुत्र वियोग के कारण ही होगी।

20👉 नंदी का ब्राह्मण कुल को श्राप
शिवपुराण के अनुसार एक बार जब सभी ऋषिगण, देवता, प्रजापति, महात्मा आदि प्रयाग में एकत्रित हुए तब वहां दक्ष प्रजापति ने भगवान शंकर का तिरस्कार किया। यह देखकर बहुत से ऋषियों ने भी दक्ष का साथ दिया। तब नंदी ने श्राप दिया कि दुष्ट ब्राह्मण स्वर्ग को ही सबसे श्रेष्ठ मानेंगे तथा क्रोध, मोह, लोभ से युक्त हो निर्लज्ज ब्राह्मण बने रहेंगे। शूद्रों का यज्ञ करवाने वाले व दरिद्र होंगे।

21👉 नलकुबेर का रावण को श्राप
वाल्मीकि रामायण के अनुसार विश्व विजय करने के लिए जब रावण स्वर्ग लोक पहुंचा तो उसे वहां रंभा नाम की अप्सरा दिखाई दी। अपनी वासना पूरी करने के लिए रावण ने उसे पकड़ लिया। तब उस अप्सरा ने कहा कि आप मुझे इस तरह से स्पर्श न करें, मैं आपके बड़े भाई कुबेर के बेटे नलकुबेर के लिए आरक्षित हूं। इसलिए मैं आपकी पुत्रवधू के समान हूं।
लेकिन रावण ने उसकी बात नहीं मानी और रंभा से दुराचार किया। यह बात जब नलकुबेर को पता चली तो उसने रावण को श्राप दिया कि आज के बाद रावण बिना किसी स्त्री की इच्छा के उसको स्पर्श करेगा तो उसका मस्तक सौ टुकड़ों में बंट जाएगा।

22👉 श्रीकृष्ण का अश्वत्थामा को श्राप
महाभारत युद्ध के अंत समय में जब अश्वत्थामा ने धोखे से पाण्डव पुत्रों का वध कर दिया, तब पाण्डव भगवान श्रीकृष्ण के साथ अश्वत्थामा का पीछा करते हुए महर्षि वेदव्यास के आश्रम तक पहुंच गए। तब अश्वत्थामा ने पाण्डवों पर ब्रह्मास्त्र का वार किया। ये देख अर्जुन ने भी अपना ब्रह्मास्त्र छोड़ा।
महर्षि व्यास ने दोनों अस्त्रों को टकराने से रोक लिया और अश्वत्थामा और अर्जुन से अपने-अपने ब्रह्मास्त्र वापस लेने को कहा। तब अर्जुन ने अपना ब्रह्मास्त्र वापस ले लिया, लेकिन अश्वत्थामा ये विद्या नहीं जानता था। इसलिए उसने अपने अस्त्र की दिशा बदलकर अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ की ओर कर दी।
यह देख भगवान श्रीकृष्ण ने अश्वत्थामा को श्राप दिया कि तुम तीन हजार वर्ष तक इस पृथ्वी पर भटकते रहोगे और किसी भी जगह, किसी पुरुष के साथ तुम्हारी बातचीत नहीं हो सकेगी। तुम्हारे शरीर से पीब और लहू की गंध निकलेगी। इसलिए तुम मनुष्यों के बीच नहीं रह सकोगे। दुर्गम वन में ही पड़े रहोगे।

23👉 तुलसी का श्रीगणेश को श्राप
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार एक बार तुलसीदेवी गंगा तट से गुजर रही थीं, उस समय वहां श्रीगणेश तप कर रहे थे। श्रीगणेश को देखकर तुलसी का मन उनकी ओर आकर्षित हो गया। तब तुलसी ने श्रीगणेश से कहा कि आप मेरे स्वामी हो जाइए, लेकिन श्रीगणेश ने तुलसी से विवाह करने से इंकार कर दिया। क्रोधवश तुलसी ने श्रीगणेश को विवाह करने का श्राप दे दिया और श्रीगणेश ने तुलसी को वृक्ष बनने का।

24👉  नारद का भगवान विष्णु को श्राप
शिवपुराण के अनुसार एक बार देवऋषि नारद एक युवती पर मोहित हो गए। उस कन्या के स्वयंवर में वे भगवान विष्णु के रूप में पहुंचे, लेकिन भगवान की माया से उनका मुंह वानर के समान हो गया। भगवान विष्णु भी स्वयंवर में पहुंचे। उन्हें देखकर उस युवती ने भगवान का वरण कर लिया। यह देखकर नारद मुनि बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने भगवान विष्णु को श्राप दिया कि जिस प्रकार तुमने मुझे स्त्री के लिए व्याकुल किया है। उसी प्रकार तुम भी स्त्री विरह का दु:ख भोगोगे। भगवान विष्णु ने राम अवतार में नारद मुनि के इस श्राप को पूरा किया ।
डॉ विकास दीप शर्मा
श्री मंशापूर्ण ज्योतिष शिवपुरी 
9993462153

बुधवार, 15 दिसंबर 2021

खर मास 16 12 2021 से 14 01 2022 तक

*खरमास* 

*14 दिसम्बर 2021 से शुरू होगा खरमास*

★  अब कुछ ही दिनों के बाद 14 दिसम्बर 2021 से खरमास आरंभ होने वाला है। 
★  हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खरमास में शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। 
★  खरमास को अशुभ माना जाता है।

★  जब सूर्य गोचरवश धनु और मीन में प्रवेश करते हैं तो इसे क्रमश धनु संक्रांति व मीन संक्रांति कहा जाता है। 
★  सूर्य किसी भी राशि में लगभग एक माह तक रहते हैं। सूर्य के धनु राशि व मीन राशि में स्थित होने की अवधि को ही खरमास कहा जाता है।

 
*🌏खरमास शुरू और समाप्त होने की तिथि :-*

•   14 दिसंबर 2021 मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से शुरू हो रहा खरमास।
•    मकर संक्रांति 14 जनवरी 2022 पौष मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि के दिन खरमास का समाप्त हो जाएगा।

★  मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2022 को मनाया जाएगा। 
★  मकर संक्रांति का विशेष धार्मिक महत्व होता है। 
★  इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। 
★  सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही मांगलिक और शुभ कार्य आरंभ हो जाएंगे।
 *डॉ विकासदीप शर्मा* *श्री मंशापूर्ण ज्योतिष शिवपुरी* 9425137382
9993462153
*🐚खरमास को अशुभ मानने के कारण :-*

एक बार सूर्य देवता अपने सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर ब्राह्मांड की परिक्रमा कर रहे थे। 
   इस दौरान उन्हें कहीं पर भी रूकने की इजाजत नहीं थी। यदि इस दौरान वो रूक जाते तो जनजीवन भी ठहर जाता। परिक्रमा शुरू की गई,
   लेकिन लगातार चलते रहने के कारण उनके रथ में जुते घोड़े थक जाते हैं, और घोड़ों को प्यास लग जाती है। 
     घोड़ों की उस दयनीय दशा को देखकर सूर्यदेव को उनकी चिंता हो गई। और वो घोड़ों को लेकर एक तालाब के किनारे चले गए, ताकि घोड़ों को पानी पिला सकें। 
     लेकिन उन्हें तभी यह आभास हुआ कि अगर रथ रूका तो अनर्थ हो जाएगा। क्योंकि रथ के रूकते ही पूरा जनजीवन भी ठहर जाता। 
डॉ विकास दीप शर्मा श्री मंशापूर्ण ज्योतिष 9425137382,9993462153
       घोड़ों का सौभाग्य ही था कि उस तालाब के किनारे दो "खर* मौजूद थे। और खर गधे को कहा जाता है। 
      भगवान सूर्यदेव की नजर उन गधों पर पड़ी और उन्होंने अपने घोड़ों को वहीं तालाब के किनारे पानी पीने और विश्राम करने के लिए छोड़ दिया, और घोड़ों की जगह पर खर यानि गधों को अपने रथ में जोड़ लिया। 
      लेकिन खरों के चलने की गति धीमी होने के कारण रथ की गति भी धीमी हो गई। फिर भी जैसे तैसे एक मास का चक्र पूरा हो गया।
       उधर तब तक घोड़ों को काफी आराम मिल चुका था। इस तरह यह क्रम चलता रहता है। 
*हर सौर वर्ष में एक सौर मास खर मास कहलाता है। जिसे मलमास के नाम से भी जाना जाता है।*

*खरमास के उपाय :-*

★  खरमास के महीने में पूजा-पाठ धर्म-कर्म, मंत्र जाप, भागवत गीता, श्रीराम की कथा, पूजा, कथावाचन, और विष्णु भगवान की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है।
★  दान, पुण्य, जप, और भगवान का ध्यान लगाने से कष्ट दूर हो जाते हैं।.
★  इस मास में भगवान शिव की आराधना करने से कष्टों का निवारण होता है।
★  शिवजी के अलावा खरमास में भगवान विष्णु की पूजा भी फलदायी मानी जाती है।
★  खरमास के महीने में सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जाता है।
★  ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत होकर तांबे के लोटे में जल, रोली या लाल चंदन, शहद लाल पुष्प डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। 
*ऐसा करना बहुत शुभ फलदायी होता है।*

धनु संक्रांति खर मास में शुभ कार्य क्यों निषेध है

धनु संक्रांति खर मास में शुभ कार्य क्यों निषेध है
****************
*ये 10 काम करने की न करें गलती*
========
धनु राशि बृहस्पति की आग्नेय राशि है और इसमें सूर्य का प्रवेश विशेष परिणाम पैदा करता है. इस समय ज्योतिषीय कारणों से शुभ कार्य वर्जित हो जाते हैं अतः इसे धनु खरमास भी कहते हैं।

जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करते हैं तो इसे धनु संक्रांति कहा जाता है।

सूर्य का किसी राशि में प्रवेश संक्रांति कहलाता है और जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करते हैं तो इसे धनु संक्रांति कहा जाता है। धनु राशी बृहस्पति की आग्नेय राशि है और इसमें सूर्य का प्रवेश विशेष परिणाम पैदा करता है। इस समय ज्योतिषीय कारणों से शुभ कार्य वर्जित हो जाते हैं अतः इसे धनु खरमास भी कहते हैं।

*इस समय विवाह क्यों वर्जित होता है?*
==========
**डॉ विकासदीप शर्मा श्री मंशापूर्ण ज्योतिष शिवपुरी* 94251373782
9993462153*
=====


- किसी भी विवाह का सबसे बड़ा उद्देश्य सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

- धनु राशी को सम्पन्नता की राशी माना जाता है।

- इस समय सूर्य धनु राशी में चला जाता है, जिसको सुख समृद्धि के लिए अच्छा नहीं माना जाता।

- इस समय अगर विवाह किया जाए तो न तो भावनात्मक सुख मिलेगा और न ही शारीरिक सुख।

*नया व्यवसाय या कार्य क्यों शुरू न करें* ?
===============
- धनु खरमास में नया व्यवसाय आरम्भ करना आर्थिक मुश्किलों को जन्म देता है, क्योंकि इस समय बिना चाहे खर्चे काफी बढ़ सकते हैं।

- इस अवधि में शुरू किए हुए व्यवसाय बीच में रुक जाते हैं।

- व्यवसाय में काफी कर्ज हो सकता है और लोगों के बीच में धन फंस सकता है।

मकान बनाने या बेचन की गलती न करें
==========
- संपत्ति बनाने का उद्देश्य संपत्ति का सुख पूर्वक उपभोग करना है।

- परन्तु अगर इस समय में मकान बनाया जाएगा तो उसका सुख मिल पाना काफी कठिन होगा।

- अगर ऐसा प्रयास किया जाए तो काम बीच में बाधाओं के कारण रुक भी सकता है।

- कभी-कभी दुर्घटनाओं की सम्भावनाएं भी बन जाती हैं।

- इस अवधि में बनाए गए मकान आम तौर पर कमजोर होते हैं और उनसे निवास का सुख नहीं मिल पाता है।

*धनु खरमास में कौन से कार्य कर सकते हैं?*
==============
- अगर प्रेम विवाह या स्वयंवर का मामला हो तो विवाह किया जा सकता है।

- अगर कुंडली में बृहस्पति धनु राशी में हो तो भी इस अवधि में शुभ कार्य किए जा सकते हैं।

- जो कार्य नियमित रूप से हो रहे हों उनको करने में भी खरमास का कोई बंधन या दबाव नहीं है।

- सीमान्त, जातकर्म और अन्नप्राशन आदि कर्म पूर्व निश्चित होने से इस अवधि में किए जा सकते हैं।